उत्तराखंड

केदारनाथ धाम में कुदरत का कहर: बसंत के आगमन पर भारी बर्फबारी, आंधी-तूफान और बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें

कई महीनों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मौसम ने करवट ली है. बरसात के बाद यह पहली बारिश और बर्फबारी मानी जा रही है. बीते महीनों में सूखते जलस्रोत, जंगलों में आग, रबी की फसलों को नुकसान और कड़ाके की ठंड ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया था.

मौसम विभाग ने पहले ही अनुमान जताया था कि 23 जनवरी, बसंत पंचमी के अवसर पर बारिश और ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है. बुधवार तड़के करीब चार बजे से ही आसमान में बादल छाने लगे और देखते ही देखते अंधेरा सा माहौल बन गया. तापमान में गिरावट के साथ ही ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी शुरू हो गई.

बर्फबारी और बारिश की खबरें सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गईं. लोग वीडियो और तस्वीरें साझा करते नजर आए. पहाड़ों पर सफेद चादर बिछने से लोगों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी और बसंत पंचमी के दिन मौसम ने मानो बसंत का स्वागत कर लिया.

केदारनाथ धाम में सुबह से लगातार बर्फबारी हो रही है. बाबा केदार बर्फ से ढके नजर आए, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में खास उत्साह देखा गया. लंबे समय बाद हिमालय की चोटियों पर बर्फ लौटने से वैज्ञानिक भी राहत महसूस कर रहे हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर बारिश और बर्फबारी होना बेहद जरूरी है. अगर यह नहीं होती, तो आने वाले समय में जल संकट और पर्यावरण से जुड़ी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं. हल्की बारिश और बर्फबारी भी मौसम संतुलन के लिए अहम मानी जा रही है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन का असर पहले ही साफ नजर आने लगा है.

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