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आखिर क्यों नाराज हैं हरियाणा के सरपंच? सीएम को ज्ञापन भेजने की तैयारी, जानें क्या हैं उनकी मांगें

चंडीगढ़: हरियाणा सरपंच एसोसिएशन प्रदेश में ग्राम सभाओं के आयोजन के लिए बदले गए नियमों के विरोध में आ गई है। एसोसिएशन ने इन नियमों को वापस लेने की मांग की है। पहले ग्राम सभा की बैठकों में प्रस्ताव पास करने के लिए 10 प्रतिशत सदस्यों की अनिवार्यता थी जबकि अब यह अनिवार्यता 20 से 40 प्रतिशत सदस्यों तक कर दी है।

एसोसिएशन का कहना है कि इससे प्रस्ताव पास न होने से विकास कार्य अटक जाएंगे। जल्द ही उपायुक्तों के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर इस नियम को वापस लेने की मांग की जाएगी। सुनवाई नहीं हुई तो जल्द ही मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्णलाल पंवार से एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल मुलाकात करेगा।

हरियाणा पंचायती अधिनियम 1994 की धारा-11 में सरकार ने संशोधन कर दिया है। ग्राम पंचायत में 18 वर्ष से अधिक उम्र का प्रत्येक नागरिक ग्राम सभा का सदस्य माना जाता है। पहले ग्राम सभा की बैठकमें कुल 10 प्रतिशत या 300 सदस्यों की संख्या की शर्त थी, लेकिन अब पहली बैठक में 40 प्रतिशत सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी है।

हरियाणा विकास एवं पंचायत निदेशक कार्यालय ने पत्र जारी किया है जिसमें 1 फरवरी तक 6205 पंचायतों में विशेष ग्राम सभाएं आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि 40 प्रतिशत का कोरम पूरा कर नहीं होता है तो अगली बार बैठक के लिए 30 प्रतिशत और फिर भी ग्राम सभा की बैठक नहीं हो पाती है तो 20 प्रतिशत सदस्यों की संख्या किसी भी प्रस्ताव को पास करने के लिए अनिवार्य कर दी गई है।

हरियाणा सरपंच एसोसिएशन के प्रधान रणबीर समैण के मुताबिक हांसी, नारनौंद व आदमपुर में आयोजित होने वाली ग्रामसभाएं कोरम पूरा न होने के कारण रद्द करनी पड़ी हैं। इसी तरह से फतेहाबाद जिले के जाखल में 24 ब्लॉक हैं यहां भी सरपंचों की के नाराजगी के कारण बैठक नहीं हो सकीं।

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