दिल्ली

जनता को पानी नहीं, प्रशासन को अतिक्रमण दिखता है? हाई कोर्ट ने लगाई सख्त फटकार

दिल्ली हाई कोर्ट 21 जनवरी को कालकाजी और नंद नगरी में मस्जिदों द्वारा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के आरोप वाली याचिका पर सुनवाई करेगा. हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा, आप हर दूसरे दिन ऐसी याचिकाएं दायर करते रहते हैं. समाज में पीने के पानी जैसी कई समस्याएं हैं. फिर भी आपको सिर्फ कब्जा ही दिखता है. इस तरह कोर्ट के मंच का गलत इस्तेमाल न करें. फिलहाल, कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कोई आदेश या नोटिस जारी नहीं किया है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा, उसे याचिकाकर्ता का ये रवैया पसंद नहीं आया. वह कोर्ट के पीआईएल अधिकार क्षेत्र का गलत इस्तेमाल कर रहा है. चीफ जस्टिस उपाध्याय ने कहा, क्या आपको सिर्फ एक ही तरह का अतिक्रमण दिखता है? आप कोर्ट की प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं. हर हफ्ते आप शहर में घूमते हैं और कोई धार्मिक ढांचा देखकर पीआईएल दायर कर देते हैं. मानवता की सेवा करने के और भी तरीके हैं.

क्या आपको समाज में कोई दूसरी बुराई नहीं दिखती?

चीफ जस्टिस ने कहा, क्या आप गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करवाना चाहते हैं? क्या आपको समाज में कोई दूसरी बुराई नहीं दिखती? लोगों को साफ पानी नहीं मिल रहा, लोग भूखे मर रहे हैं, क्या वो नहीं दिखता? आपको सिर्फ अतिक्रमण दिखता है? इस तरह पीआईएल का गलत इस्तेमाल न करें. ऐसी याचिकाएं हमें परेशान करती हैं.

बता दें कि याचिका में कोर्ट से पीडब्ल्यूडी, डीडीए और एमसीडी को मस्जिदों के पास के इलाकों का सर्वे करने और सरकारी जमीन पर सभी अवैध निर्माणों को हटाने के निर्देश देने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता द्वारा दायर 2 पीआईएल आज कोर्ट के सामने लिस्टेड थीं. इनमें से एक जामा मस्जिद और मदरसा गिरी नगर से जुड़ी थी. इसमें कहा गया कि इस ढांचे ने सरकार की हरी-भरी, धर्मनिरपेक्ष जमीन पर अतिक्रमण किया है.

शिकायतें दर्ज होने के बावजूद मस्जिद के खिलाफ कार्रवाई नहीं

याचिकाकर्ता ने कहा, शिकायतें दर्ज होने के बावजूद मस्जिद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई. इस बीच दिल्ली सरकार की ओर से वकील ने कहा, स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, यह ढांचा अतिक्रमण था. वहीं, दिल्ली वक्फ बोर्ड की ओर से सीनियर एडवोकेट संजय घोष पेश हुए. उन्होंने तर्क दिया कि मस्जिद एक नोटिफाइड ढांचा है. दिल्ली विकास प्राधिकरण ने भी जमीन की हदबंदी में हिस्सा लिया था.

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