बढ़ती आबादी का असर: एसटीपी पर दूषित पानी की निकासी का बोझ, सीईटीपी दो साल से खामोश

भिवानी। शहर का दायरा और आबादी बढ़ने के साथ ही जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के सीवरेज ट्रिटमेंट प्लांटों पर दूषित पानी की निकासी का दबाव बढ़ गया है। इतना ही नहीं औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 के लिए 18 करोड़ रुपये से बने कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट भी पर्यावरण एनओसी नहीं मिलने के कारण करीब दो साल से खामोश पड़ा है। बिना ट्रिटमेंट के दूषित पानी भिवानी-घग्गर ड्रेन में छोड़ा जा रहा है जिससे किसान सिंचाई से भी तौबा कर रहे हैं।
औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 के लिए रोहतक रोड, पालुवास मोड़ पर 10 एमएलडी क्षमता का कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट बनकर दो साल से तैयार है। इस प्लांट के जरिए औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला रसायन युक्त दूषित पानी ट्रिटमेंट के बाद ढाणा डिस्पोजल के रास्ते खेतों में सिंचाई के लिए भेजा जाना था लेकिन यह प्लांट 18 करोड़ की मशीनरी के बावजूद खामोश है। मशीनें जंग खाकर जाम होने लगी हैं। यही वजह है कि ट्रिटमेंट प्लांट की क्षमता से लगभग ढाई गुना दूषित पानी शहर से निकल रहा है और सीधे भिवानी-घग्गर ड्रेन में छोड़ा जा रहा है।
औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 की करीब 300 से अधिक औद्योगिक इकाइयों के दूषित पानी की निकासी के लिए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट सफेद हाथी बन चुका है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद प्लांट से किसी औद्योगिक इकाई को फायदा नहीं मिला। उद्योगों से निकलने वाला कैमिकल युक्त गंदा पानी सीवर जाम कर रहा है और पर्यावरण प्रदूषण व बीमारियों का संक्रमण बढ़ा रहा है।
शहर के अंदर सीवर लाइनें ठप हैं और वाटर ट्रिटमेंट प्लांट भी ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। 12-15 साल पुराने इन प्लांटों में रखरखाव की गंभीर लापरवाही के कारण गंदा पानी भूमिगत जलस्तर और खेतों की फसलों को प्रभावित कर रहा है।
सीवरेज ट्रिटमेंट प्लांटों की हालत बदतर है। टैंकों में पहले से ही गंदगी भरी पड़ी है। डिस्पोजल से सीधे शहर का दूषित पानी भिवानी-घग्गर ड्रेन में डाला जा रहा है। ड्रेन खुली और कच्ची होने के कारण किनारे बार-बार टूट रहे हैं जिससे पर्यावरण और फसलें प्रभावित हो रही हैं।
शहर के अलावा आसपास के गांव भी विकसित हो चुके हैं जहां सीवर सिस्टम डाला जा रहा है। इनके दूषित पानी से ड्रेन पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है लेकिन वाटर ट्रिटमेंट प्लांट पर न संसाधन बढ़े हैं न ढांचागत सुविधाओं का विस्तार हुआ है। बिना ट्रिटमेंट के ही गंदा पानी ड्रेनों और नहरों में छोड़ा जा रहा है।
औद्योगिक सेक्टरों का पालुवास पर बनकर तैयार कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट संचालन के लिए पर्यावरण एनओसी अनिवार्य है। प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। एनओसी मिलते ही प्लांट चालू कर दिया जाएगा और इसके संचालन में कोई अन्य अड़चन नहीं है।




