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इस रेलवे स्टेशन पर रविवार को शांत, ट्रेनों के हॉर्न की आवाज नहीं आती

भारतीय रेलवे इन दिनों अपनी नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को लेकर लगातार चर्चा में बना हुआ है. यह ट्रेन न सिर्फ लंबी दूरी के यात्रियों के लिए एक नया अनुभव लेकर आएगी, बल्कि रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम भी मानी जा रही है. भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है, जो रोजाना करोड़ों यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाता है. रेलवे के विकास में स्टेशनों के विस्तार और नवीनीकरण ने बेहद अहम भूमिका निभाई है.

पिछले कुछ सालों में देशभर के कई रेलवे स्टेशनों को पूरी तरह नया रूप दिया गया है. कहीं एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं दी गई हैं तो कहीं डिजिटल सिस्टम बनाए गए हैं. वहीं भारत में कई ऐसे अनोखे रेलवे स्टेशन हैं, जिनके बारे में सुनकर आपको यकीन नहीं होगा. सोशल मीडिया पर एक से एक अनोखे स्टेशन के बारे में आपने जरूर सुना और देखा होगा. जैसे- नवापुर रेलवे स्टेशन एक ऐसा अनोखा स्टेशन है, जो महाराष्ट्र और गुजरात दोनों राज्यों में स्थित है. इसी तरह, अटारी रेलवे स्टेशन एक ऐसा स्टेशन है, जहां जाने के लिए वीजा की जरूरत होती है.

पश्चिम बंगाल का अनोखा रेलवे स्टेशन

भारत के अनोखे स्टेशनों की लिस्ट में ‘वेंकटनारसिंहराजुवरिपेटा’ जैसा स्टेशन भी शामिल है, जिसके नाम में बहुत सारे अक्षर आते हैं. इन्हीं अनोखे रेलवे स्टेशनों की लिस्ट में एक बेहद खास स्टेशन पश्चिम बंगाल में भी मौजूद है, जो अपनी अनोखी शांति के लिए जाना जाता है. यह स्टेशन पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. आमतौर पर रेलवे स्टेशन शोरगुल, यात्रियों की भीड़, ट्रेनों की आवाज और अनाउंसमेंट से भरे रहते हैं, लेकिन यह स्टेशन इन सबसे बिल्कुल अलग है.

इस स्टेशन की सबसे खास बात यह है कि रविवार के दिन यहां पूरी तरह सन्नाटा छा जाता है. न कोई ट्रेन आती है, न किसी ट्रेन का हॉर्न सुनाई देता है, न सीटी बजती है और न ही प्लेटफॉर्म पर किसी तरह की अनाउंसमेंट होती है. मानो, ऐसा लगता है कि जैसे यह रेलवे स्टेशन एक दिन के लिए पूरी तरह ठहर सा जाता है. हालांकि, आमतौर पर भी इस स्टेशन पर सिर्फ बांकुरामासग्राम यात्री ट्रेन ही रुकती है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि रविवार के दिन यह यात्री ट्रेन भी यहां नहीं आती. नतीजा यह होता है कि पूरे दिन स्टेशन पर कोई एक्टिविटी नहीं होती.

रविवार को छा जाता है पूरी तरह सन्नाटा

रविवार को यह रेलवे स्टेशन पूरी तरह सुनसान हो जाता है. प्लेटफॉर्म खाली रहते हैं, पटरियों पर कोई हलचल नहीं दिखती और टिकट खिड़कियों के आसपास भी कोई मौजूद नहीं होता.जब ट्रेनें नहीं आतीं, तो न हॉर्न की आवाज सुनाई देती है और न ही अनाउंसमेंट सिस्टम एक्टिव रहता है. चारों ओर एक अजीब सी शांति फैल जाती है.

यही अनोखी शांति इस स्टेशन को भारत के सबसे अलग और दिलचस्प रेलवे स्टेशनों में शामिल करती है, जहां एक तरफ देश के ज्यादातर स्टेशन 24 घंटे व्यस्त रहते हैं, वहीं यह स्टेशन रविवार को पूरी तरह शांत रहकर अपनी अलग पहचान बनाता है. यही वजह है कि रेलवे से जुड़े अनोखे और दिलचस्प तथ्यों में इस स्टेशन का नाम खास तौर पर लिया जाता है.

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