Life Style

ट्रेडिशनल से ट्रेंडी: कश्मीरी फेरन का स्टाइल और बनावट का सफर

कश्मीर की ठंडी वादियों में सदियों से पहना जाने वाला कश्मीरी फेरन आज सिर्फ ट्रेडिशनल पोशाक नहीं रह गया है, बल्कि फैशन की दुनिया में एक नया ट्रेंड बन चुका है. पहले फेरन को केवल सर्दी से बचने के लिए पहना जाता था, लेकिन अब इसके डिजाइन, रंग और कढ़ाई ने इसे स्टाइल स्टेटमेंट बना दिया है. यही वजह है कि कश्मीर से बाहर भी लोग इसे बड़े शौक से पहनने लगे हैं. फेरन को लोग सिर्फ ठंड से बचने के लिए नहीं. बल्कि सर्दियों में भी स्टाइलिश दिखने के लिए भी पहन रही हैं. दिल्ली में तो फेरन आपको कई मार्केट में भी मिल जाएगा.

लेकिन कश्मीर का ये ट्रेडिशनल फेरन इतना ट्रेंडिंग कैसे बन गया है. चलिए इस आर्टिकल में आपको भी बताते हैं फेरन की खासियत, इसे कैसे बनाया जाता है और किस तरह स्टाइल किया जाता है.

ट्रेडिशनल से ट्रेंडी बना कश्मीरी फेरन

कश्मीरी फेरन की सबसे बड़ी खासियत इसकी आरामदायक बनावट और जबरदस्त गर्माहट है. इसे इस तरह डिजाइन किया जाता है कि ये शरीर को पूरी तरह ढक ले और ठंड से बचाए. पारंपरिक फेरन ऊनी कपड़े से बनाया जाता था, लेकिन समय के साथ इसमें कश्मीरी ऊन, ट्वीड, वेलवेट और यहां तक कि फाइन वूल जैसे कपड़ों का इस्तेमाल भी होने लगा है. इससे फेरन पहले से ज्यादा स्टाइलिश और हल्का बन गया है.

फेरन की कढ़ाई बनाती है इसे खास

आज के दौर में फेरन पर की जाने वाली कश्मीरी कढ़ाई, खासकर सोजनी और अरी वर्क, इसे और भी खास बना देती है. हाथ से की गई ये कारीगरी न सिर्फ इसकी खूबसूरती बढ़ाती है, बल्कि कश्मीर की समृद्ध कला और संस्कृति को भी दर्शाती है. यही कारण है कि फैशन डिजाइनर्स भी अब फेरन को मॉडर्न टच देकर रैम्प और विंटर कलेक्शन में शामिल कर रहे हैं.

कैसे और कितने दिन में बनता है 1 फेरन

फेरन को बनाने के लिए ऊनी और रेशमी कपड़ो को चुना जाता है. वहीं, 1 फेरन बनाने का समय उसकी डिजाइन और कढ़ाई पर निर्भर करता है. जैसे एक आम फेरन बनाने में आमतौर पर 1-2 घंटे का समय लगता है. वहीं, अगर कोई खास कढ़ाई का फेरन बनाया जा रहा है, जैसे तिल्ला वर्क या बारीक कढ़ाई तो उसमें कई दिन और हफ्ते तक लग सकते हैं.

Related Articles

Back to top button