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हरियाणा पुलिस अधिकारी को राहत: हाईकोर्ट ने रद्द की 3 साल की वेतन वृद्धि रोकने की सजा; रिव्यू पावर पर दिया बड़ा फैसला

चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक फैसले में हरियाणा पुलिस के एक अधिकारी पर लगाई गई 3 वार्षिक वेतन वृद्धि में स्थायी रूप से रोकने की सजा को रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि पंजाब पुलिस नियमों के तहत समीक्षा का अधिकार अनिश्चित काल तक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता और इसे उचित समय-सीमा के भीतर ही लागू किया जाना चाहिए। जस्टिस जगमोहन बंसल ने यह निर्णय देते हुए कहा कि अत्यधिक देरी के बाद समीक्षा शक्तियों का प्रयोग कानून की भावना के विपरीत है।

मामला हरियाणा पुलिस के कर्मचारी सतबीर सिंह से जुड़ा था, जिन्होंने 1989 में बतौर कांस्टेबल सेवा शुरू की थी और बाद में पदोन्नत होते हुए विभिन्न पदों पर कार्य किया। वर्ष 2006 में नारनौल में जिला पुलिस निरीक्षक के रीडर पद पर तैनाती के दौरान वाहन पंजीकरण फाइलों में कथित रूप से फर्जी मोहर और हस्ताक्षर इस्तेमाल किए जाने के आरोपों के संबंध में विभागीय जांच शुरू की गई थी। इसी मामले में एक एफ. आई.आर. भी दर्ज हुई थी, हालांकि उसमें सतबीर सिंह का नाम शामिल नहीं था।

प्रारंभिक और नियमित दोनों विभागीय जांच में उन्हें निर्दोष पाया गया और 13 अक्तूबर 2008 को पुलिस अधीक्षक ने जांच अधिकारी की रिपोर्ट स्वीकार करते हुए कार्रवाई समाप्त कर दी। इसके बावजूद लगभग अढ़ाई वर्ष बाद, 15 अप्रैल 2011 को रेवाड़ी के तत्कालीन आई.जी.पी. ने पंजाब पुलिस नियम 16.28 के तहत समीक्षा अधिकार का प्रयोग करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया और 4 अक्तूबर 2011 को 3 वार्षिक वेतन वृद्धि में स्थायी रूप से रोकने की सजा सुना दी। इस आदेश के खिलाफ दायर अपील भी डी.जी.पी. स्तर पर खारिज कर दी गई।

इसके अतिरिक्त, वर्ष 2019 में अधिकारी की वर्ष 2006-07 की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ए.सी.आर.) को भी डाऊनग्रेड कर दिया गया, जो उसी सजा आदेश के आधार पर किया गया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यद्यपि संबंधित नियम में समीक्षा के लिए कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं है, फिर भी इस अधिकार का प्रयोग ‘उचित अवधि’ के भीतर ही किया जाना चाहिए।

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