100 साल की दादी ने मनाया जन्मदिन, हिसार में रही धूम, अच्छी सेहत का राज भी बताया

हिसार: हिसार जिले के आदमपुर क्षेत्र के दड़ौली गांव की बुजुर्ग महिला मीरा देवी ने अपना 100वां जन्मदिन मनाया. मीरा देवी के परिवार ने बड़े धूमधाम से उनका बर्थडे मनाया. इस दौरान पूरा गांव, रिश्तेदार और परिचितों से लेकर दूर-दराज के लोग शामिल हुए और दादी को लंबी उम्र की शुभकामनाएं दीं.
100 साल की उम्र में भी पूरी तरह स्वस्थ: मीरा देवी आज 100 साल की उम्र में भी पूरी तरह स्वस्थ हैं. उनकी सुनने की शक्ति ठीक है, चलने-फिरने में सक्षम हैं. कभी-कभार ब्लड प्रेशर बढ़ने पर दवा लेती हैं. इसके अलावा किसी गंभीर बीमारी का उन्हें सामना नहीं करना पड़ा. परिवार का कहना है कि दादी की सादगी और संयम ही उनकी लंबी उम्र का रहस्य है.
हर दिन खाती हैं दूध-दही, दाल-रोटी: मीरा देवी ने अपने जीवन से हरियाणा की मशहूर कहावत “हरियाणा जित दूध-दही का खाना” को सही साबित कर दिखाया है. मीरा देवी के घरवालों की मानें तो उन्होंने जीवन भर सादा और घर का बना भोजन खाया है. दूध, लस्सी, दही, सादी रोटी, दाल और हरी सब्जियां उनके भोजन का हिस्सा रहीं. बाहर का तला-भुना और जंक फूड उन्होंने कभी पसंद नहीं किया, जिसका असर आज उनकी सेहत में साफ दिखाई देता है.
भरपूर परिवार, छह बेटे और तीन बेटियां: मीरा देवी का परिवार आज एक बड़ा और खुशहाल परिवार बन चुका है.उनके छह बेटे और तीन बेटियां हैं. परिवार में 16 पोते-पोतियां, दो दोहते-दोहितियां और पांच परपोते भी हैं. सबसे बड़े बेटे सज्जन कुमार 77 वर्ष के हैं, जबकि अन्य बेटे राजेंद्र (71), महेंद्र (61), शंकर लाल (60), प्रदीप कुमार (56) और संदीप (53) वर्ष के हैं. बेटियां ओम देवी और कृष्णा देवी राजस्थान के जोनाइता कला में विवाहित हैं.
खेती, शिक्षा और सेवा से जुड़ा परिवार: मीरा देवी के परिवार के सदस्य विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं. बड़े बेटे सज्जन कुमार और राजेंद्र खेती का कार्य करते हैं. शंकर लाल सेवानिवृत्त अध्यापक हैं, जबकि महेंद्र एक कॉलेज में लेक्चरर रहे हैं. परिवार ने हमेशा मेहनत, ईमानदारी और शिक्षा को महत्व दिया है, जिसका असर पीढ़ियों तक देखने को मिलता है.
अंग्रेजों की सेना में थे पति: मीरा देवी के पति स्वर्गीय बिहारी लाल शर्मा का जीवन भी देशभक्ति से जुड़ा रहा. आजादी से पहले वे अंग्रेजी सेना में कुक के रूप में कार्यरत थे और ब्रिटेन में ड्यूटी करते थे. बाद में उन्होंने अंग्रेजी सेना छोड़कर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज जॉइन की और देश की आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया. आजादी के बाद वे बिना पेंशन के गांव लौट आए और सादा जीवन बिताया. साल 1998 में उनका निधन हो गया.
हजार लोग पहुंचे दावत में: मीरा देवी के 100वें जन्मदिन पर परिवार ने लगभग एक हजार लोगों को दावत पर बुलाया था. भोजन में गाजर का हलवा, दूध-जलेबी, गुलाब जामुन, लड्डू और पारंपरिक हरियाणवी व्यंजन परोसे गए. पूरा आयोजन किसी बड़े वैवाहिक समारोह की तरह किया गया, जिसमें रिश्तेदार और गांव वाले शामिल हुए. इस दौरान लोगों ने जमकर डांस भी किया.
हनुमान जी की भक्त हैं दादी: मीरा देवी धार्मिक प्रवृत्ति की महिला हैं. वो हनुमान जी और खाटू श्याम जी की भक्ति करती हैं और नियमित रूप से पूजा-पाठ करती रही हैं. जीवन भर उन्होंने खेती और पशुपालन के कामों में परिवार का साथ दिया, जिससे वे शारीरिक रूप से सक्रिय बनी रहीं. यही सक्रिय जीवनशैली उनकी अच्छी सेहत का एक और कारण मानी जाती है.
बेटे शंकर लाल बोले-“सादगी ही लंबी उम्र का राज”: मीरा देवी के बेटे और सेवानिवृत्त अध्यापक शंकर लाल ने बताया कि, “मेरी मां हमेशा शांत, सरल और मिलनसार स्वभाव की रही हैं. उन्होंने पूरे परिवार को जोड़कर रखा और कभी भी दिखावे का जीवन नहीं जिया. सादा खाना, नियमित दिनचर्या और सकारात्मक सोच ही मेरी माता की लंबी उम्र और अच्छी सेहत का राज है.”
गांव के लिए बनी प्रेरणा: दड़ौली गांव की ढाणी में रहने वाली मीरा देवी आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. 100 साल की उम्र में भी उनका स्वस्थ और संतुलित जीवन यह संदेश देता है कि सादा जीवन, संयमित खान-पान और पारिवारिक प्रेम से लंबी और खुशहाल उम्र पाई जा सकती है. उनका यह शताब्दी जन्मोत्सव न केवल परिवार बल्कि पूरे गांव के लिए यादगार बन गया.




